श्री गुरु तेग बहादुर खालसा महाविद्यालय, जबलपुर के हिंदी विभाग द्वारा 24 जून 2026 को "भारतीय ज्ञान परंपरा और हिंदी साहित्य : समकालीन संदर्भ" विषय पर व्याख्यान एवं विचार गोष्ठी का आयोजन प्राचार्य डॉ. आर. एस. चंडोक के मार्गदर्शन में किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य भारतीय ज्ञान परंपरा की समृद्ध विरासत, हिंदी साहित्य में उसकी अभिव्यक्ति तथा वर्तमान समय में उसकी प्रासंगिकता पर विचार-विमर्श करना था।
कार्यक्रम का शुभारंभ सरस्वती वंदना एवं दीप प्रज्ज्वलन से हुआ। इस अवसर पर प्राचार्य डॉ. आर. एस. चंडोक, हिंदी विभागाध्यक्ष एवं कार्यक्रम संयोजक डॉ. शिवमणि मिश्रा, IQAC प्रभारी डॉ. अंजू पाठक तथा कंप्यूटर साइंस विभागाध्यक्ष डॉ. संजय गुप्ता मंचासीन रहे।
अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में प्राचार्य डॉ. चंडोक ने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा विश्व की सबसे प्राचीन एवं समृद्ध धरोहरों में से एक है। वेद, उपनिषद, रामायण और महाभारत में निहित जीवन-मूल्य आज भी मानवता के लिए प्रेरणास्रोत हैं। उन्होंने विद्यार्थियों से आधुनिक शिक्षा के साथ भारतीय संस्कृति एवं साहित्य का अध्ययन करने का आग्रह किया तथा नई शिक्षा नीति (NEP-2020) में भारतीय ज्ञान परंपरा के महत्व पर प्रकाश डाला।
व्याख्यान सत्र में डॉ. शिवमणि मिश्रा ने भारतीय दर्शन, संस्कृति, नैतिकता, लोकजीवन एवं हिंदी साहित्य के विविध आयामों पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि हिंदी साहित्य ने सदियों से भारतीय जीवन-मूल्यों और सामाजिक चेतना को जन-जन तक पहुँचाने का कार्य किया है तथा भारतीय ज्ञान परंपरा वर्तमान और भविष्य दोनों के लिए मार्गदर्शक है।
विचार-विमर्श सत्र में विद्यार्थियों ने भारतीय ज्ञान परंपरा की वर्तमान उपयोगिता, हिंदी साहित्य की सामाजिक भूमिका, नई शिक्षा नीति तथा सांस्कृतिक मूल्यों के संरक्षण जैसे विषयों पर अपने विचार प्रस्तुत किए। कार्यक्रम का संचालन डॉ. नेहा ताम्रकार एवं आभार प्रदर्शन डॉ. सरिता शर्मा ने किया।
यह आयोजन ज्ञानवर्धक एवं प्रेरणादायी रहा तथा विद्यार्थियों में भारतीय ज्ञान परंपरा और हिंदी साहित्य के प्रति जागरूकता एवं सम्मान की भावना को सुदृढ़ करने में सफल सिद्ध हुआ। इस अवसर पर श्रीमती प्राची खरे, डॉ. पुष्पलता पचौरी, श्रीमती सुचिता पटेल एवं बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे।
